नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका एक और नई कहानी वीडियो में ! तो आज की हमारी कहानी कहती है कि अपनी हद से ज्यादा आराम और आलस्य इंसान को बर्बाद कर ही देता है | मेहनत शांति और धैर्य से हर कोई चीज प्राप्त की जा सकती है | ऐसा गौतम बुद्ध ने कई सालों पहले अपने शिष्यों से क्यों कहा था इसके पीछे का रहस्य क्या है | आज इसी रहस्य को हम उनकी कहानियों के माध्यम से समझेंगे | तो बिना देर किए चलिए उन कहानियों की शुरुआत करते हैं |
शांत रहकर अपने अंदर देखो | Stay Calm and Look Within Yourself - A Buddha Story

पहली कहानी:-
पहली कहानी एक बार की बात है एक शक्तिशाली राजा घने वन में शिकार कर रहा था | अचानक आकाश में बादल छा गए और मूसलाधार वर्षा होने लगी सूर्य अस्त हो गया और धीरे-धीरे अंधेरा छाने लगा अंधेरे में राजा अपने महल का रास्ता भूल गया और सिपाहियों से अलग हो गया भूख प्यास और थकावट से व्याकुल राजा जंगल के किनारे एक टीले पर बैठ गया | थोड़ी देर बाद उसने वहां तीन बालकों को देखा तीनों बालक अच्छे मित्र थे | वे गांव की ओर जा रहे थे राजा ने कहा सुनो बच्चों जरा यहां आओ राजा ने उन्हें अपने पास बुलाया बालक जब वहां पहुंचे तो राजा ने उनसे पूछा क्या कहीं से थोड़ा भोजन और जल मिलेगा मैं बहुत प्यासा हूं और मुझे भूख भी बहुत लगी है |
बालकों ने उत्तर दिया अवश्य हम घर जाकर अभी कुछ ले आते हैं | वे एक गांव की ओर भागे और तुरंत राजा के लिए जल और भोजन ले आए राजा बच्चों के उत्साह और प्रेम को देखकर बहुत प्रसन्न हुआ राजा बोला प्यारे बच्चों तुम लोग जीवन में क्या करना चाहते हो | मैं तुम सबकी सहायता करना चाहता हूं | कुछ देर सोचने के बाद एक बालक बोला मुझे धन चाहिए मैंने कभी दो समय की रोटी नहीं खाई है | कभी सुंदर वस्त्र नहीं पहने हैं इसलिए मुझे केवल धन चाहिए |
राजा मुस्कुरा कर बोले ठीक है मैं तुम्हें इतना धन दूंगा कि जीवन भर सुखी रहोगे यह शब्द सुनते ही बालकों की खुशी का ठिकाना ना रहा दूसरे बालक ने बड़े उत्साह से पूछा क्या आप मुझे एक बड़ा सा बंगला और घोड़ा गाड़ी देंगे | राजा ने कहा अगर तुम्हें यही चाहिए तो तुम्हारी इच्छा भी पूरी हो जाएगी तीसरे बालक ने कहा मुझे ना धन चाहिए ना ही बंगला गाड़ी मुझे तो आप ऐसा आशीर्वाद दीजिए जिससे मैं पढ़ लिखकर विद्वान बन सकूं और शिक्षा समाप्त होने पर मैं अपने देश की सेवा कर सकूं | तीसरे बालक की इच्छा सुनकर राजा बहुत प्रभाव हुआ उसने उसके लिए उत्तम शिक्षा का प्रबंध करवाए |
वह परिश्रमी बालक था | इसलिए दिन रात एक करके उसने पढ़ाई की और बहुत बड़ा विद्वान बन गया और समय आने पर राजा ने उसे अपने राज्य में मंत्री पद पर नियुक्त कर लिया | एक दिन अचानक राजा को वर्षों पहले की उस घटना की याद आई | उन्होंने मंत्री से कहा वर्षों पहले तुम्हारे साथ जो दो और बालक थे अब उनका क्या हालचाल है | मैं चाहता हूं कि एक बार फिर मैं एक साथ तुम तीनों से मिलू | अतः तुम कल अपने उन दोनों मित्रों को भोजन पर आमंत्रित कर लो | मंत्री ने उन दोनों को संदेश भेजवा दिया और अगले दिन सभी एक साथ राजा के सामने उपस्थित हो गए | आज तुम तीनों को एक बार फिर साथ देखकर मैं बहुत प्रसन्न हूं |
इसके बारे में तो मैं जानता हूं पर तुम दोनों अपने बारे में बताओ राजा ने मंत्री के कंधे पर हाथ रखते हुए जिंस बालक ने धन मांगा था | बहुत दुखी होते हैं बोला राजा साहब मैंने उस दिन आपसे धन मांगकर बड़ी गलती की इतना सारा धन पाकर मैं आलसी बन गया और बहुत सारा धन बेकार की चीजों में खर्च कर दिया | मेरा बहुत सा धन चोरी भी हो गया और कुछ वर्ष में ही मैं वापस उसी स्थिति में पहुंच गया | जिसमें आपने मुझे देखा था |
बंगला गाड़ी मांगने वाले बालक भी अपना रोना रोने लगा | महाराज मैं बड़े ठाट से अपने बंगले में रह रहा था पर वर्षों पहले आई बाढ़ में मेरा सब कुछ बर्बाद हो गया और मैं भी अपने पहले जैसी स्थिति में पहुंच गया | उनकी बातें सुनने के बाद राजा बोले इस बात को अच्छी तरह गांठ बांध लो | धन संपदा सदा हमारे पास नहीं रहते पर ज्ञान जीवन भर मनुष्य के काम आता है और उसे कोई छुरा भी नहीं सकता | शिक्षा ही मानव को विद्वान और बड़ा आदमी बना सकती है | इसलिए सबसे बड़ा धन विद्या ही है |
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दूसरी कहानी:-
मेहनत और ईमानदारी से काम करते हैं तो आपको सफलता जरूर मिलेगी |
तो दोस्तों अब चलिए बढ़ते हैं हमारी दूसरी कहानी की तरफ एक बार की बात है महात्मा बुद्ध की सबसे प्रिय और निकटतम शिष्य आनंद कहीं जा रहे थे | रास्ते में उसने देखा कि एक अधेड़ उम्र का आदमी चट्टान पर बैठा रो रहा है | यह देखकर आनंद वहीं रुक गए और उस आदमी के पास जाकर उससे उसकी उदासी का कारण पूछा | उस आदमी ने अपने आंसू पहुंचते हुए कहा मैं पास के गांव में रहने वाला एक बदकिस्मत व्यापारी हूं | मैं जो भी काम करता हूं वह गलत हो जाता है | व्यापार की चाह में मैंने अपनी मां और पत्नी के गहने खो दिए | अपना परिवार खो दिया और अब अपना घर और खेत भी गिरवी रख दिया है | मुझे लगता है कि मेरी किस्मत खराब है |
उसकी बात सुनकर आनंद ने कहा तुम्हें किसने कहा कि तुम्हारी किस्मत खराब है मुझे भी तो बताओ कि तुम्हारी किस्मत में क्या खराबी है शख्स ने बताया कि पहले वह खेती करता था | लेकिन हर साल इसमें घाटा हो जाता था | कभी सूखा पड़ा तो कभी अतिवृष्टि से फसल खराब हो गई कभी आवारा जानवर फसल को नुकसान पहुंचाते हैं | तो कभी कीड़े मकोड़े और बीमारियां फसल को बर्बाद कर देती हैं | खेती से मेरे परिवार का गुजारा ठीक से नहीं हो पाता था | जिसके कारण मैंने खेती छोड़ दी और बिजनेस करने का फैसला किया | मैंने अपनी पत्नी के गहने बेचकर अपना व्यवसाय शुरू किया | लेकिन मेरा व्यवसाय नहीं चला शुरुआत में मेरे परिवार के सदस्यों ने मेरी आर्थिक मदद की और मेरा समर्थन किया |
लेकिन जैसे ही मुझे घाटा होने लगा | मेरे परिवार के सदस्यों ने भी मुझे छोड़ दिया और उन्होंने मुंह मोड़ लिया | मुझसे अब वे मुझे देखकर नजरें फेर लेते हैं और अपने परिवार की गरीबी और दुर्दशा के लिए मुझे जिम्मेदार ठहराते हैं | अब मुझे लगने लगा कि मेरा जीवन निरर्थक है अक्सर मेरे मन में विचार आते हैं कि मुझे अपना जीवन समाप्त कर लेना चाहिए और आज मैंने ऐसा कर लिया यहां आत्महत्या करने आए थे | लेकिन मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी इसलिए मैं इस पत्थर पर बैठकर रो रहा था | दूसरी ओर मेरा एक दोस्त है हम दोनों ने एक साथ व्यवसाय शुरू किया | लेकिन वह आगे बढ़ गया और मैं पीछे रह गया मेरी असफलता के कारण वह मुझे हर समय अपमानित करने की कोशिश करता रहता है और वह अक्सर मेरे पास आता है | वह अपनी सफलता के बारे में बड़ी-बड़ी बातें करता है |
वह मेरे परिवार को बताता है कि उसने कितनी मेहनत करके इतना बड़ा व्यवसाय खड़ा किया है | और वह अक्सर मुझे मेरी पत्नी और मेरे माता-पिता को अपने फलते फूलते व्यवसाय की कहानियां सुनता है | जिससे मेरा परिवार प्रशंसा करता है लेकिन वे मेरे बारे में बुरा बोलते हैं वे मुझे निकम्मा और कमजोर दिमाग वाला कहते हैं | मेरी पत्नी और मां मुझे हर बात पर ताना मारते हैं | जिससे मुझे बहुत दुख होता है और कभी-कभी मुझे अपनी असफलता पर गुस्सा आता है | लेकिन मैं समझ नहीं पाता क्या करें यह सुनकर भिक्षु आनंद ने पूछा आपको किस बात से दूख होता है | आपकी अपनी असफलता या आपके मित्र की सफलता सवाल सुनकर |
उस आदमी ने एक पल सोचा और फिर कहा सच बताऊं तो मुझे अपनी असफलता पर उतना दुख नहीं होता | जितना अपने दोस्त की सफलता पर होता है | भिक्षु आनंद ने अगला प्रश्न पूछा यदि आपका मित्र वसाय में असफल हो जाता और आप सफल हो जाते तो क्या आप खुश होते व्यक्ति ने कहा हां मुझे बहुत खुशी होगी | आनंद ने कहा मतलब आपकी खुशी आपके दोस्त पर निर्भर करती है | अगर वह चाहे तो आपको खुश कर सकता है और अगर वह चाहे तो आपको दुखी भी कर सकता है | आप खुद से ना तो खुश हो सकते हैं और ना ही दुखी भिक्षु आनंद की बातें सुनकर वह व्यक्ति कुछ देर सोच में पड़ गया और फिर बोला आपकी बातें सुनकर मुझे कुछ आशा जगी है |
तब भिक्षु आनंद ने कहा जब हम किसी चीज की आशा करते हैं तो हम उस पर निर्भर हो जाते हैं | फिर हमारा सुख दुख भी उस पर निर्भर होने लगता है इसलिए सबसे अच्छा है कि आप खुद से ही उम्मीद करना शुरू कर दें | जब आप ऐसा करते हैं और साथ ही मेहनत और ईमानदारी से काम करते हैं तो आपको सफलता जरूर मिलेगी | आप सोचते हैं कि आपका दोस्त आपको नीचा दिखाने के लिए आता है वह आपको दुखी करने के लिए आता है | लेकिन अगर आप ईमानदारी से सोचे तो वह जो बातें कहता है वह सच होती है | आपको उनके संघर्षों और अनुभवों के बारे में बताता है आप उन चीजों से बहुत कुछ सीख सकते हैं | आपको उनका आभारी होना चाहिए कि आपको घर बैठे इतने सारे अनुभव मिल रहे हैं | उन अनुभवों का लाभ उठाएं नई शुरुआत करें ईमानदारी से काम करते रहे कभी नहीं हार मानो एक दिन तुम्हें सफलता अवश्य मिलेगी |
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आज तुम इसे दुर्भाग्य या बुरा समय कह रहे हो एक दिन बदलेगा और इसके साथ ही तुम्हारी सोच और विचार भी बदल जाएंगे और देखिए जब आपका अच्छा समय शुरू होगा | तो आपके दोस्त भी आपको उसकी सफलता की कहानी नहीं बताएंगे फिर उससे आपको अपनी असफलताओं और परेशानियों के बारे में बताने दें ताकि आप उसकी बात सुनकर भ्रमित हो जाएं | आपका आत्मविश्वास हिल जाता है और आप गलत निर्णय ले सकते हैं | लेकिन उस समय भी आपको अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करना होगा और खुद पर भरोसा रखना होगा | जिस तरह आज आपका दोस्त आपको दुखी करने के लिए आएगा | उसी तरह वह उस समय भी आपको बनाने के लिए आएगा क्योंकि जैसे तुम्हें उसे दुखी देखकर आनंद आता है | वैसे ही उसे भी तुम्हें दुखी देखकर आनंद आता है |
उस व्यक्ति ने कहा आप सही कह रहे हैं लेकिन मुझे सबसे बड़ा दुखी यह है कि इसमें मेरे परिवार के लोग भी शामिल हैं | दरअसल मैं अपने परिवार के लिए अच्छा करना चाहता था और उन्हें खुश रखना चाहता था | लेकिन वह मेरी बात भी नहीं समझ रहा है शब्द और भावनाएं वे मुझे गलत कहते हैं और कुछ समय के लिए वह मेरे साथ भी नहीं है | भिक्षु आनंद ने उस व्यक्ति को समझाया कि हम हमेशा चाहते हैं कि हम जो भी करें लोग उसकी प्रशंसा करें | लेकिन आमतौर पर ऐसा नहीं होता लोग करते हैं हमारे प्रयास की सराहना नहीं करते जिसके कारण हम दुखी हो जाते हैं |
हमें लगने लगता है कि हमारे दोस्त रिश्तेदार और परिवार के सभी सदस्य स्वार्थी हैं | लेकिन अगर आप किसी को अपना परिवार मानते हैं और उनके लिए कुछ करना चाहते हैं तो आप ऐसा क्यों सोचते हैं आप दूसरों के लिए कुछ कर रहे हैं | वास्तव में आप अपनी खुशी के लिए कुछ कर रहे हैं क्योंकि उन्हें कुछ करते हुए देखना ही आपको कुछ बनाता है | आप कुछ अगर ऐसा करते समय आप सोचते हैं कि आप दूसरों के लिए कुछ कर रहे हैं | तो आप दुखी रहेंगे लेकिन अगर आप सोचते हैं कि आप यह अपने लिए कर रहे हैं | तो आप खुश होंगे क्योंकि जब हम ऐसा करते हैं या करना चाहते हैं | अपने लिए कुछ है तो हमें इसके लिए शांत बनने की आवश्यकता नहीं है |
भिक्षु आनंद की यह बातें सुनकर उस व्यक्ति के चेहरे के भाव बिल्कुल बदल गए | उसने कहा आप ठीक कह रहे हो | साधु लेकिन मैं समझता था कि अब तक मेरी किस्मत खराब थी क्योंकि वह दूसरों के हाथ में थी | लेकिन अब से मैं अपनी किस्मत अपने हाथ में रखूंगा और फिर से प्रयास करूंगा और पूरी ताकत से काम करूंगा | समर्पण और ईमानदारी और जब तक मुझे सफलता नहीं मिल जाती मैं चैन से नहीं बैठूंगा यह सुनकर भिक्षु आनंद मुस्कुराए और उन्हें एक छोटी सी डिब्बी देते हुए कहा इस डिब्बी को हमेशा अपने पास रखना | इसमें एक मंत्र है जो तुम्हें बड़े से बड़े दुख से भी बाहर निकाल देगा |
लेकिन इस डिब्बी को तभी खोलना जब तुम्हारे सारे रास्ते बंद हो जाए बंद है | कोई आशा नहीं है और तुम्हें लगता है कि सब कुछ व्यर्थ है यह दुनिया व्यर्थ है और यहां रहना भी व्यर्थ है | उस आदमी ने साधु आनंद को धन्यवाद दिया और बक्सा लेकर अपने घर लौट आया | उन्होंने नए उत्साह के साथ अपना व्यवसाय फिर से शुरू किया और इस बार उनका बिजनेस चल निकला | अपनी मेहनत और लगन के दम पर कुछ ही सालों में यह एक बड़े बिजनेसमैन बन गए | उनके साथ उनके परिजन भी आए थे और उसका जीवन अत्यंत सुख शांति और समृद्धि से बीतने लगा |
लेकिन वक्त और किस्मत के खेल को आज तक कोई नहीं समझ पाया है और ना ही कोई समझ पाएगा यह हमेशा एक जैसा नहीं रहता यह बदलता रहता है | वे भी व्यक्ति के जीवन में परिवर्तन जो व्यक्ति जीस राज्य में रहता था | उस पर पड़ोसी राज्य के राजा द्वारा आक्रमण कर दिया जाता था | उस हमले और डकैती में उस व्यक्ति का सारा पैसा भी लूट लिया गया | उनकी दुकान और घर जला दिया गया | अपनी जान बचाने के लिए उन्हें अपने परिवार सहित वहां से भागना पड़ा व्यक्ति कई दिनों तक अपने परिवार के साथ इधर-उधर भटकता रहा | वह हर छोटी चीज के लिए मोहताज हो गए उनका बच्चा बीमार हो गया और इलाज के अभाव में बीमारी से बुरी तरह पीड़ित होने लगा |
यह देखकर उसका हृदय चीत्कार करने लगा उनके पास अपने बेटे का इलाज कराने और अपने परिवार का भरण पोषण करने के लिए पैसे के नाम पर एक सिक्का भी नहीं था | वह अंदर से टूट गया था और निराशा एक बार फिर उस पर हावी हो गई उसे लगने लगा कि उसका जीवन निरर्थक है सारा संसार अर्थहीन था | लेकिन तभी अचानक उसे भिक्षुक आनंद द्वारा गई डिब्बी की याद आई उसने बड़ी उत्सुकता से उसे खोला तो डिब्बे के अंदर एक पर्ची मिली उस पर कुछ लिखा हुआ था | पर्ची पढ़ते ही उसकी आंखों के सामने छाया निराशा का अंधेरा गायब हो गया और वह अचानक मुस्कुरा दिया |
पर्ची पर लिखा था कि यह वक्त भी गुजर जाएगा दोस्तों यह कहानी हमें सिखाती है कि समय के खेल को समझना संभव है | यह हमेशा बदलता रहता है इसलिए हमें बुरी परिस्थितियों में निराश नहीं होना चाहिए | आत्मविश्वास बनाए रखना होगा क्योंकि समय बदलता है यदि आज बुरा है तो कल निश्चित ही अच्छा होगा | तो दोस्तों कैसी लगी आपको यह कहानी आप हमें कमेंट सेक्शन में जरूर बताना और तो चलिए मिलते हैं ऐसी ही कोई नई कहानी तब तक के लिए अपना ख्याल रखें धन्यवाद और नमोह बुद्धाय !
निष्कर्ष
बौद्ध धर्म की इस यात्रा में, "शांत रहकर अपने अंदर देखो" ना केवल आत्म-जागरूकता की ओर एक कदम है, बल्कि यह आत्म-सुधार और शांति की ओर एक यात्रा भी है। Mind 4 Magic के माध्यम से, हमने बुद्ध की कहानियों के जरिए आत्म-अन्वेषण की गहराइयों में डूबने का अवसर पाया है। यह सिखाता है कि कैसे शांति और ध्यान से हम अपने जीवन को अधिक सार्थक और खुशहाल बना सकते हैं।
FAQs
1. शांत रहकर अंदर देखने का क्या महत्व है?
शांत रहकर अंदर देखने से हमें आत्म-जागरूकता मिलती है, जिससे हम अपने मन की गहराइयों को समझ सकते हैं और आत्म-सुधार की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं।2. बुद्ध की कहानियां हमें क्या सिखाती हैं?
बुद्ध की कहानियां हमें धैर्य, करुणा, अहिंसा और जीवन के प्रति सही दृष्टिकोण अपनाने की सीख देती हैं।
3. माइंड 4 मैजिक (Mind 4 Magic) क्या है?
माइंड 4 मैजिक (Mind 4 Magic) एक ऐसा मंच है जो आत्म-जागरूकता, मन की शांति और बौद्ध दर्शन के जरिए जीवन को समृद्ध बनाने की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करता है।
4. आत्म-जागरूकता का जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है?
आत्म-जागरूकता से हमें अपनी शक्तियों और कमजोरियों का पता चलता है, जिससे हम बेहतर निर्णय ले सकते हैं और अधिक संतुलित जीवन जी सकते हैं।
आत्म-जागरूकता से हमें अपनी शक्तियों और कमजोरियों का पता चलता है, जिससे हम बेहतर निर्णय ले सकते हैं और अधिक संतुलित जीवन जी सकते हैं।
5. ध्यान और शांति कैसे प्राप्त की जा सकती है?
ध्यान और शांति के लिए नियमित ध्यान प्रैक्टिस, स्वयं के प्रति करुणा और समझ, और जीवन में सादगी अपनाने जैसे तरीके प्रभावी हैं।
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