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असम्भव कुछ भी नहीं | Buddhist Story on Nothing is Impossible

असम्भव कुछ भी नहीं | Buddhist Story on Nothing is Impossible


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Buddhist Story on Nothing is Impossible


असम्भव कुछ भी नहीं | Buddhist Story on Nothing is Impossible
दोस्तों किसी भी चीज को छोटा समझकर हमें उसे कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से हम जीवन में बड़ी परेशानियों को न्यौता देते हैं आइए इसे एक कहानी के माध्यम से समझते हैं नमस्कार दोस्तों माइंड फॉर मैजिक य चैनल में आपका दिल से स्वागत है बहुत समय पहले की बात है एक छोटा सा राज्य था उस राज्य का राजा बहुत ही दयालु था उस राजा का इकलौता पुत्र था | 

लेकिन वह जो पुत्र था वह लाड़ प्यार में बिगड़ता चला जा रहा था 10-12 साल का हुआ तो हरकतें उसकी ऐसी हो गई थी कि राजा को बात-बात पर गुस्सा आने लगा था और एक दिन राजा को अपने पुत्र के गलत आचरण पर इतना गुस्सा आया कि अपने ही पुत्र को अपने ही बेटे को राजकुमार को राज्य से बाहर निकाल दिया दरबार में मंत्रियों ने समझाया कि महाराज आपके पुत्र हैं राजकुमार हैं आगे यही चलकर के राजा बनेंगे उसने कहा राजा ने किसी की नहीं सुनी रानी रोती रह गई रानी ने भी राजा को बहुत समझाया कि उसे राज्य से बाहर ना करें लेकिन राजा ने राजकुमार को बाहर भेज दिया ऐसे ही दो साल बीत चुके थे | 

अब समय के साथ जब राजा बूढ़ा हुआ और उसे लगा कि वाकई में राज्य को अब राजा देना होगा तो उसने अपने मंत्रियों को बुलाया और कहा कि देखो सैनिकों को मेरे बेटे को लेकर के जाओ और मेरे बेटे को ढूंढ करके लाओ राजा ने अपने सैनिकों को राजकुमार को ढूंढने के लिए भेज दिया इधर जो राज ने अपने मंत्रियों को भेजा था सैनिकों के साथ में तो ढूंढ रहे थे सैनिकों ने उसे सब जगह ढूंढ लिया जंगल में गांव में पर उसे राजकुमार कहीं नहीं मिल पाए एक बार की बात है एक दिन राजा यूं ही महल का चक्कर लगा रहे थे तभी राजा के मन में विचार आया कि उसे अपने राज्य की खुशहाली के लिए पहाड़ों के बीच में बने मंदिर में भगवान के दर्शन करना चाहिए लेकिन वह यह कार्य अकेले करना चाहता था वह चाहता था कि उनके साथ कोई ना चले वह अकेला ही इस यात्रा को खुद तय करेंगे और शायद उन्हें अपना बेटा वापस मिल जाए | 

लेकिन उस रास्ते पर एक घना जंगल था फिर भी राजा ने निश्चय किया कि वह मंदिर जरूर जाएंगे राज्य के सभी लोग और मंत्री ने राजा को समझाने की बहुत कोशिश कि उन्हें उस जंगल में अकेले नहीं जाना चाहिए वहां बहुत खतरा है और उस जंगल में आज से पहले जो भी गया कोई वापस नहीं आया कुछ दिन बाद एक दिन ऐसा भी आया जब राजा ने सभा में सभी लोगों से कहा कि मैं कल भगवान के दर्शन के लिए जा रहा हूं मंत्री बोले महाराज हमने आपसे पहले भी कहा था कि हम में से आप कुछ लोगों को अपने साथ लेकर चलिए राजा बोला नहीं मंत्री जी हम पहले कह चुके हैं कि हमें उधर अकेले ही जाना है क्या तुम्हें अपने राजा की वीरता पर संदेह है | 

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मंत्री बोला नहीं महाराज हमें आपकी वीरता पर कोई संदेह नहीं है लेकिन उस जंगल के रास्ते में एक दो फीट का आदमी रहता है वह बड़ा ही खतरनाक है जो भी उसके सामने आता है वह उसे मार देता है साथ ही साथ वह बड़ा चालक भी है इसलिए उस जंगल में आपका अकेले जानासुरक्षित नहीं है राजा बोला यदि वह मेरे सामने आया तो वह खुद जिंदा नहीं बचेगा मंत्री बोला ठीक है | 

महाराज आप अकेले जाना चाहते तो आप जा सकते हैं लेकिन आप बस एक बात याद रखना कि जैसे ही वह आपके सामने आए आप उसे थोड़ा सा भी मौका मत देना और उसे से मार देना नहीं तो वह आपको चोट पहुंचा सकता है राजा ने बोला तुम लोग मेरी चिंता मत करो मैं अपनी रक्षा खुद कर सकता हूं कल मैं यात्रा के लिए निकल रहा हूं सभा समाप्त हो गई और रात हो गई रानी ने राजा से कहा कि महाराज आपका वहां अकेले जाना सुरक्षित नहीं है हमने अपने बेटे को पहले ही खो सुके हैं और अब आप भी चले गए तो हमारा क्या होगा और रानी यह कहकर रोने लगी राजा ने रानी से कहा कि देखना में जब वापस आऊंगा |

तो अपने बेटे को भी साथ लेकर आऊंगा और राजा सो गए रात भी गुजर गई अगले दिन राजा के यात्रा पर निकलने का वक्त हो चुका था राजा यात्रा के लिए अपने महल से घोड़े पर बैठकर निकल गए राजा अब महल से काफी दूर आ गए थे रास्ते में उन्हें एक गांव नजर आया तो राजा ने एक आदमी से उस मंदिर तक जाने का रास्ता पूछा उस आदमी ने राजा से कहा कि आपका वहां अकेले जाना सुरक्षित नहीं हे राजा ने कहा आप मेरी चिंता मत करो तो उस आदमी ने कहा कि आप यहां से सीधे चले जाइए थोड़ी दूर जाने के बाद आपको एक जंगल दिखेगा आपको उस जंगल को पार करना हे उसके बाद आप मंदिर तक पहुंच जाएंगे राजा अब वहां से आगे बढ़ चुके थे |

जैसे ही वह जंगल में कुछ आगे बढ़े उनके सामने वहीं दो फुट का आदमी आ गया राजा उसे देखते ही चौकन्ना हो गए राजा घोड़े से नीचे उत्तरे राजा उससे कुछ पूछते उसे पहले उस दो फुट आदमी ने राजा पर हमला करने लगा राजा ने अपनी तलवार निकाल ली और उसे लड़ने लगे लड़ते-लड़ते उन्होंने उस दो फीट के आदमी को नीचे गिरा दिया और उसकी गर्दन पर तलवार रखकर उसे मारने ही वाले थे कि वह छोटा आदमी बोला राजा जी मुझे माफ कर दो आप तो सचमुच बहुत बहादुर और पराक्रमी हो आपसे पहले बहुत बड़े-बड़े लोग आए लेकिन वह मुझसे जीत नहीं पाए मैं आपसे माफी मांगता हूं आप मुझे छोड़ दो राजा सोचने लगे मेरे मंत्री और सेनापति ना जाने क्यों इस दो फीट के आदमी से डर रहे थे | 


इसे तो मैंने ऐसे ही हरा दिया राजा अब अपनी यात्रा के लिए कुछ आगे निकल आए वह जो दो फुट का आदमी था अब वह दो फुट से 4 फुट का हो गया था उसने राजा पर फिर से हमला किया राजा ने भी अपनी तलवार निकाली और उस चार फुट आदमी से लड़ने लगे राजा ने उसको फिर एक बार हरा दिया आदमी बोला राजा जी मुझे माफ कर दो आप बड़े ही दयालु हैं राजा बोले तुमसे पहले मैंने एक दो फुट के आदमी को हराया है और और उस पर दया करके उसको छोड़ दिया है जाओ तुम्हें भी मैं छोड़ता हूं तुम भी क्या याद रखोगे मेरी मंजिल कुछ और है तुम्हें मारकर मुझे क्या मिलेगा ऐसा कहकर राजा ने उसे छोड़ दिया |

उसके बाद राजा ने अब अपनी यात्रा आगे बढ़ाई राजा चलते चलते काफी दूर आ गए थे और सुबह से वह ऐसे ही चल रहे थे शाम भी हो चुकी थी इसलिए राजा ने एक पेड़ के नीचे थोड़ा आराम किया वह बैठे ही थे कि उन्होंने देखा कि 8 फुट का एक आदमी तेजी से उनकी तरफ आ रहा हे राजा उसे देखकर काफी भयभीत हो गए क्योंकि वह आदमी आकार में बहुत ही लंबा था जो उस छोटे आदमी ने अपना आकार 4 फुट से 8 फुट कर लिया वह फिर राजा से लड़ने के लिए आया राजा उसे देखकर हैरान हो गए इतना बड़ा कौन आदमी है राजा पूरी जान से उससे लड़े लेकिन वह जीत नहीं पाए उस ठ फुट के आदमी ने उन्हें मार दिया और राजा की मृत्यु हो गई यह बात अब महल तक पहुंच गई थी कि राजा की मृत्यु हो गई रानी के आंसू रुक नहीं रहे थे सब बहुत परेशान थे कुछ दिन बाद राजा के जो मंत्री थे | 

उन्होंने फिर से सैनिकों के साथ वह राजकुमार को ढूंढने के लिए निकल गए मंत्री और सैनिकों ने उन्हें काफी ढूंढा फिर उन्हें राज्य के बाहर एक नगर के चौराहे पर एक व्यक्ति भीख मांग रहा था रोज की तरह दोपहर का समय था और उस राजा के जो मंत्री थे वह सैनिकों थे उन्होंने देखा कि चौराहे पर बैठा था तो मंत्री ने कहा यह देखा देखा सा लग रहा है आंखें मिल गई और जहां आंखें मिल गई तो मंत्री ने सैनिकों से कहा रुक जाओ रुक जाओ लेकर आओ इसको उसको लेकर के आए मंत्री ने देखा कि उस युवक के हाथों में राज चिन्ह था जो कि सिर्फ राजकुमार के ही हाथ पर था मंत्री अचानक उसके से पैरों में गिर गया | 

सारे सैनिक घोड़े पर से उतर गए महाराज की जय हो महाराज की जय हो कहने लगे और यह जो फटे पुराने हाल में बैठा हुआ था बिल्कुल बेडग हो चुका था जिसका शरीर कमजोर सा लग रहा था सैनिकों ने राजकुमार को घोड़े पर बैठाकर वहां से निकले इसी तरह हमारे जीवन में छोटी-छोटी मुश्किलें और समस्याएं आती रहती हैं जिन्हें हम नजरअंदाज करते रहते हैं लेकिन धीरे-धीरे यह समस्या बड़ी होती रहती है और जब यह समस्या बहुत बड़े रूप में हमारे सामने आती है तो हम उसका हल नहीं निकाल पाते जिसका अंजाम बहुत बुरा हो सकता है | 


जब समस्या छोटे रूप में हमारे सामने आती है तो उसका हल आसानी से निकाला जा सकता है लेकिन समस्या बड़ी हो जाने पर हमारी मुश्किलें और भी बढ़ जाती हैं जैसे हम किसी कार्य को कल पर छोड़ देते हैं यह सोचकर कि यह तो इतना सा है लेकिन वक्त के साथ-साथ वह कार्य भी बड़ा हो जाता है इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि जीवन जब भी परेशानी या समस्या आए तो हमें उसी समय उस समस्या का हल निकाल लेना चाहिए क्योंकि अगर अगर आपने उसे अनदेखा कर दिया तो यह समस्या बड़ी होती चली जाएगी उसके बाद हो सकता है | 

आप इस समस्या का हल नहीं निकाल पाओ छोटी समस्या को हल करना आसान होता है और बड़ी समस्या को हल करना मुश्किल इसलिए किसी भी समस्या को कल पर नहीं छोड़े बल्कि उसे आज ही हल कर दें दोस्तों आपने आज के इस वीडियो से क्या सीखा वह मुझे आप कमेंट में बता सकते हैं इसी के साथ में उम्मीद है कि आपको आज की वीडियो पसंद आई होगी तो इस वीडियो को उस इंसान को शेयर करें जिससे यह कहानी सुनने की जरूरत है और उसी के ठीक बाद चैनल को सब्सक्राइब करें तो चलिए फिर मिलते हैं ऐसी एक और नई वीडियो में एक नए मैसेज के साथ तब तक के लिए अपना ख्याल रखें धन्यवाद और नमोह बुद्धाय ! 


निष्कर्ष:
अंत में, यह बौद्ध कहानी खूबसूरती से दर्शाती है कि अटूट विश्वास और दृढ़ संकल्प के साथ, कुछ भी असंभव नहीं है। शिक्षाएँ इस बात पर ज़ोर देती हैं कि चुनौतियाँ विकास के अवसर हैं और सही मानसिकता से हर बाधा को दूर किया जा सकता है। यह कहानी हमें अपनी क्षमता पर विश्वास करने और कठिनाइयों का सामना करने के लिए प्रोत्साहित करती है, यह जानते हुए कि कुछ भी हासिल किया जा सकता है।

FAQs: 

1. बौद्ध कहानी "कुछ भी असंभव नहीं है" का मुख्य संदेश क्या है? 

मुख्य संदेश यह है कि दृढ़ संकल्प, विश्वास और दृढ़ता से किसी भी बाधा को दूर किया जा सकता है, और वास्तव में कुछ भी असंभव नहीं है।

2. यह कहानी बौद्ध शिक्षाओं से कैसे संबंधित है? 

यह कहानी लचीलेपन, आंतरिक शक्ति और चुनौतियों पर काबू पाने के लिए मानवीय आत्मा की शक्ति पर मूल बौद्ध शिक्षाओं का प्रतीक है।

3. क्या यह कहानी वास्तविक जीवन की स्थितियों पर लागू की जा सकती है?

हां, कहानी एक शक्तिशाली अनुस्मारक के रूप में कार्य करती है कि वास्तविक जीवन में, सकारात्मक मानसिकता और दृढ़ता के साथ चुनौतियों का सामना किया जा सकता है, जिससे सफलता प्राप्त होती है।

4. इस बौद्ध कहानी से हम क्या सीख सकते हैं?

मुख्य पाठों में दृढ़ संकल्प का महत्व, विश्वास की शक्ति और यह विचार शामिल है कि कठिनाइयों के बावजूद दृढ़ता हमें अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद कर सकती है।

5. कुछ भी असंभव नहीं है" की अवधारणा महत्वपूर्ण क्यों है?

यह महत्वपूर्ण है क्योंकि यह आशा और आत्मविश्वास को प्रेरित करता है, व्यक्तियों को अपने सपनों के लिए प्रयास करने और अपनी क्षमताओं पर विश्वास करने के लिए प्रोत्साहित करता है, भले ही उन्हें कितनी भी चुनौतियों का सामना करना पड़े।

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